Saturday, 3 February 2018

मच्छरों के काटने से होती हैं ये 5 बीमारियां, हो सकती है मौत भी


मच्छर दिखने में भले ही छोटा होता है, लेकिन इन दिनों यह कई गंभीर बीमारियों की वजह बन रहा है। पहले मच्छर आमतौर पर बरसात के बाद ही नजर आते थे, लेकिन अब तो यह हर मौसम में दिखाई देने लगे हैं। मच्छरों से होने वाली बीमारियां खासकर कैरेबियाई देशों में महामारी बन गई हैं। इंडिया में भी लाखों लोग मच्छर जनित बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इस पैकेज में हम बता रहे हैं कि मच्छरों के काटने से कौन-सी 5 बीमारियां हो सकती हैं।


1. येलो फीवर

येलो फीवर या पीत ज्वर एक वायरस से फैलता है जिसे मच्छर कैरी करते हैं। इससे खासकर कैरेबियाई और उप-सहारा देशों में हर साल करीब दो लाख लोग प्रभावित होते हैं। किसी व्यक्ति में इस वायरस के संक्रमण का पता कुछ दिन बाद ही चलता है। इसके करीब 15 फीसदी मरीज दूसरे चरण में पहुंच जाते हैं, जिसमें मृत्युदर 50 प्रतिशत है। इसे येलो फीवर इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके सिम्पटम्स बहुत कुछ पीलिया से मिलते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर लिवर पर पड़ता है।

2. डेंगू

डेंगू मादा एडिस मच्छर के काटने से होता है। हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार दुनिया की आधी आबादी पर डेंगू का खतरा है। इसके मुख्य सिम्टम्स में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शामिल होते हैं। इससे बचने के लिए कोई खास दवा नहीं बनी है। इसलिए इसके मरीज को रेस्ट करने और अधिक से अधिक लिक्विड डाइट लेने की सलाह दी जाती है। फीवर कम करने के लिए पैरासिटामोल की गोलियां दी जाती हैं। डेंगू होने पर बोनमैरो में प्लेटलेट्स बननी बंद हो जाती हैं।

3. चिकनगुनिया

इस बीमारी के बारे में सबसे पहले पता तंजानिया में 1952 में चला था। हालांकि यह जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन इसमें तकलीफ काफी होती है। इसमें तेज बुखार और जोड़ों में दर्द होता है। वैसे यह कमजोर और बुजुर्ग लोगों की मौत की वजह बन सकती है।


4. ला क्रोसे इंसेफलाइटिस

मच्छर से पैदा होने वाले इस वायरस का नाम USA के विस्कॉन्सिन स्टेट के ला क्रोसे शहर के नाम पर पड़ा, जहां पहली बार 1963 में इसके बारे में मालूम चला था। वैसे यह काफी रेयर बीमारी है। इससे पीड़ितों को बुखार, सिरदर्द, उल्टी, थकान और सुस्ती हो सकती है। इसके बहुत अधिक सीरियस होने पर बेहोशी या कोमा और लकवे की प्रॉब्लम भी हो सकती है।

5. मलेरिया

यह मादा 'एनाफिलीज' मच्छर के काटने से होता है। ये मच्छर आमतौर पर सूर्य ढलने के बाद काटते हैं। मलेरिया में यूजवली एक दिन छोड़कर बुखार आता है। पेशेंट को बुखार के साथ कंपकंपी भी लगती है। इसके अलावा इस बीमारी में कमजोरी भी महसूस होती है।

आपके घुटनों को पूरी तरह खराब कर सकती हैं ये 5 गलतियां, सही समय पर हो जाएं अलर्ट


दिनभर में हम कई ऐसे काम करते हैं जिनका हमारी हेल्थ पर बुरा असर पड़ने लगता है। इन्हीं में से कुछ ऐसी गलतियां हैं जो हमारे घुटनों को नुकसान पहुंचाने लगते हैं। अगर इन गलतियों को छोड़ दिया जाए तो हम हमारे घुटनों को खराब होने से बचा सकते हैं। हम यहां आपको कुछ ऐसी ही गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपके घुटनों को खराब कर सकती हैं।
 गलत पॉश्चर में बैठना
गलत पॉश्चर में लगातार कई घंटे बैठे रहने से घुटने की मसल्स डैमेज होने लगती हैं। इससे इनमें सूजन और दर्द की शिकायत होने लगती है। लंबे समय तक ऐसा करने से घुटने खराब भी होने लगते हैं।
हाई हील पहनना
अगर महिलाएं या लड़किया ज्यादा देर तक हाई हील वाली सैंडल पहनती हैं तो इससे बॉडी पॉश्चर बिगड़ता है। ऐसे में घुटनों पर बुरा असर पड़ता है जिससे
दर्द की शिकायत हो सकती है।

दा वजन उठाना
कैपेसिटी से ज्यादा वजन उठाने के कारण घुटने कमजोर होने लगते हैं। खासकर महिलाएं घर का काम करते समय ज्यादा वजन उठाती हैं तो उनके घुटने में सूजन, दर्द और ऐंठन जैसी प्रॉब्लम हो सकती है।
 
 ओवर एक्सरसाइज करना
जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज या वर्कआउट करने का बुरा असर घुटनों पर भी पड़ने लगता है। इससे घुटनों में सूजन और दर्द की शिकायत हो सकती है।
 मोटापा बढ़ाते रहना
लंबे समय तक मोटापा बढ़ाते रहने और सही समय पर इसे कंट्रोल न करने के कारण घुटनों पर ज्यादा जोर पड़ता है। इससे घुटने कमजोर होने लगते हैं साथ ही दर्द की शिकायत भी बनी रहती है।

क्या आप जानते हैं? सोने से पहले 1 गिलास गर्म पानी पीने से बॉडी पर होता है कैसा असर

सुबह उठने के बाद गर्म पानी पीने के फायदों के बारे में तो आपने सुना होगा या कहें कि आपको इसके बारे में पता होगा। लेकिन सोने के पहले गर्म पानी पीने से क्या होता है शायद आप नहीं जानते होंगे। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ अबरार मुलतानी कहते हैं कि सोने के 15 मिनट पहले 1 गिलास गर्म बॉडी पर ऐसा असर करता है कि इससे कई सारे फायदे होने लगते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।


टेंशन होता है दूर
रात को सोने से पहले गर्म पानी का सेवन करने से हमारा सारा तनाव दूर हो जाता है और हमें नींद भी अच्छी आती है। मगर ध्यान रहे के ज्यादा पानी नहीं पीना है। ये गिलास या जितनी प्यास लगे उतना ही पानी पीना है।





रात में सोने से पहले खाएं सिर्फ 2 इलायची, सुबह देखें इसका कमाल

इलायची हर भारतीय के घर में पाई जाती है। इसके अलग टेस्ट के कारण ये सभी को पसंद होती है। इसको खाने से कई सारे फायदे होते हैं। इलायची में आयरन, विटामिन सी, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम ये सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये मुंह की बदबू को दूर करने के साथ ही एनीमिया से बचाती है।


इसलिए रात में सोने से पहले खाना चाहिए इलायची
इलायची में नेचुरल तत्व होते हैं जो खाने को पचाने में मदद करते हैं। ये पेट की जलन और सूजन को भी कम करती है। इलायची से गैस, पेट खराब जैसी परेशानियां ठीक हो जाती हैं। रात को सोने से पहले दो इलायची खाने से पाचन ठीक रहता है।



रात के खाने में नहीं खाना चाहिए ये 5 चीजें, होते हैं इतने नुकसान

खाने का हमारी बॉडी पर बहुत असर होता है। ब्रेकफास्ट से लेकर डिनर तक हम दिनभर में जो भी फूड खाते हैं। उस पर ही हमारी हेल्द डिपेंड करती है। यहां आपको ऐसे फूड्स के बारे में बता रहे हैं जिन्हें रात के समय नहीं खाना चाहिए। इनसे वजन बढ़ने के साथ ही डाइजेशन स्लो होता है। इसके अलावा दूसरे हेल्द इशू भी होते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।


चिप्स
चिप्स खाना सबसे ज्यादा कंवीनियंट लगता है। लेकिन ये खाना बेहद नुकसानदेह है। चिप्स में मोनोसोडियम और ग्लूमेट होता है। ये वजन बढ़ाने के साथ ही नींद को डिस्टर्ब करता है। इसलिए इसे रात में नहीं खाना चाहिए।





मुंह की बदबू देती है इन 10 बीमारियों के संकेत

बिजी लाइफस्टाइल, गलत खानपान और दांतों की सफाई न रखने के कारण अक्सर मुंह से बदबू आने लगती है। अधिकतर हम इसे नॉर्मल प्रॉब्लम मानकर इग्नोर कर देते हैं। लेकिन यह प्रॉब्लम लंबे समय तक बनी रहे तो हमें कई तरह की बीमारियों का संकेत भी देती है।








एसिडिटी का दमदार नुस्खा, आपने आज तक नहीं किया होगा यूज

एसिटिडी की प्रॉब्लम दूर करने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय आजामाते हैं। लेकिन कुछ ऐसे दमदार उपाय भी हैं जो आमतौर पर लोगों को पता नहीं होते हैं। अगर सही तरीके से इन उपायों को आजमाया जाए तो एसिडिटी की प्रॉब्लम से जल्द राहत मिल सकती है।

कैसे बढ़ता है बॉडी में एसिड?
 
जब हम कुछ खाते हैं तो हमारा पेट उस खाने को डाइजेस्ट करने के लिए एसिड बनाने लगता है। इस दौरान अनहेल्दी डाइट के कारण पेट में जरूरत से ज्यादा एसिड बनने लगता है। कई बार ज्यादा खाने, भूखा रहने, फास्ट फूड और मिर्च-मसालेदार खाना खा लेने से एसिडिटी की प्रॉब्लम हो जाती है।












 

कैसे चुनें अपने Baby के लिए सबसे Best तेल? जानिए यहां


बहुत ही कम लोगों को यह बात मालूम होगी कि बेबी की स्किन adults की तुलना में 20 से 30 फीसदी ज्यादा पतली होती है। ऐसे में बेबी के लिए ऐसे प्रोडक्ट्स का सिलेक्शन करना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है जो उसकी स्किन को सूट करते हों।


भारत में मालिश या मसाज एक पॉपुलर प्रैक्टिस है। मालिश से बच्चे की मसल्स मजबूत होती है और वह हेल्दी बनता है। इसलिए डॉक्टर्स भी हर रोज हल्के हाथों से मसाज करने की सलाह देते हैं। लेकिन मसाज करने से पहले माताओं को इस एक बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि आप सही तेल का चुनाव कर रही हैं या नहीं। कंसलटेंट पीडियाट्रिशियन डॉ. सोमू शिवबालन हमेशा अनएडल्टीरेटेड ऑयल (unadulterated oil) का यूज करने की सलाह देते हैं। इसमें विटामिन ई होता है जो बेबी के लिए अच्छा और सुरक्षित माना जाता है। हालांकि कुछ मांएं सरसों का तेल और 100 फीसदी वर्जिन ऑलिव ऑइल जैसे नैचुरल ऑइल का भी यूज़ करती हैं। लेकिन इन तेलों में बड़ी मात्रा में ओएलिक एसिड (oleic acid) होता है जिससे बेबी की त्वचा पर बाहरी खतरा बढ़ जाता है। इससे बेबी की त्वचा में बाहरी इरिटेशन की संभावना भी बढ़ जाती है।
क्यों अच्छा होता है मिनरल ऑयल?

डॉ. सोमू शिवबालन के अनुसार सबसे बेस्ट ऑयल होता है हाईली प्यूरीफाइड बेबी आयल जो मिनरल ऑयल से बनाया जाता है। यह बेबी की स्किन के लिए काफी स्मूद होता है और पसीने के पोर्स भी बंद नहीं करता। मिनरल ऑयल पतला होने के कारण बेबी की स्किन पर आसानी से फैलता है। इससे तेल के बेबी की स्किन के फोल्ड्स में इकट्ठा होने की संभावना कम होती है। इससे इरिटेशन की संभावना भी कम होती है। 

कितना सुरक्षित है मिनरल आयल?

मिनरल ऑयल को क्रूड ऑयल से तैयार किया जाता है। लेकिन इसे प्यूरीफिकेशन की कई प्रोसेस से गुजरना पड़ता है जो कि सुरक्षित होती है। डॉ. सोमू कहते हैं कि अगर मिनरल ऑयल को देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितना कलरलेस और क्लियर होता है। इसकी यह क्लियरनेस ही फार्मेस्यूटिकल ग्रेड मिनरल ऑयल की शुद्धता का संकेत होती है। डॉ. सोमू के अनुसार बच्चों के लिए मिनरल ऑयल का यूज न केवल उसकी माइल्डनेस के लिए टेस्टेड है, बल्कि पूरी तरह सेफ भी। मिनरल ऑइल का इस्तेमाल आमतौर पर स्किन केअर प्रोडक्ट्स, दवाइयों और फूड्स में किया जाता है। 

इसलिए इतना खास है जॉनसन & जॉनसन का बेबी ऑयल

Johnson's Baby OIL फार्मेस्यूटिकल ग्रेड के मिनरल ऑयल से बना होता है। इसीलिए यह एक क्लियर और कलरलेस तेल है। डॉ. सोमू कहते हैं कि अगर मिनरल ऑयल कलरलेस और क्लियर हो तो वह उसके फार्मेस्यूटिकल ग्रेड के होने का संकेत है। डॉ. सोमू के अनुसार क्लिनीकली प्रमाणित मिनरल ऑयल बेबी के लिए पूरी तरह सेफ़ है।
इसमें नैचुरल विटामिन ई होता है जो स्किन को ड्राय होने से बचाता है। यह बेबी की स्किन पर ऐसा सिल्की बैरियर बना देता है जिससे अतिरिक्त मॉइश्चर लॉस रुकता है। इससे बेबी की स्किन सॉफ्ट और स्मूद बनी रहती है।
जॉनसन&जॉनसन का बेबी ऑयल एलर्जी टेस्टेड है और बच्चे की मालिश के लिए सबसे सही है।